GK चिंतनधारा २२ “मेरी गणित”

GK चिंतनधारा २२  Dt २४.०७.२०१६ “मेरी गणित” मैं “एक” आत्मा हूँ और स्वय के लिए सारे विश्व में एकमात्र शरण रूप हूँ पर अनादि से इस देह में रमता आया हूँ इस देह में एकत्व ममत्व कर्तत्व और भोक्र्तत्व का अनुभव करता आया हूँ कभी ये जाना ही नही कि देह और आत्मा “दो”Read More

GK अंतर्भाव 55

GK अंतर्भाव 55 (संशोधित) दिनांक 23 02 2018 आगम का न मान रहा कुछ, खुद आगम बन बैठा है। धर्म विरोधी करतूतों पर, सारा जग यह ऐंठा है। सोच रहा हूँ मन ही मन मैं क्यों इनसे तकरार करूँ? क्यों इनके चक्कर मे *जीके* नरभव निज बेकार करुँ? कौन किसे समझा सकता है, कौन किसेRead More

GK चिंतनधारा 1 – मैं और मेरा शरीर

*”ऑनलाइन जैन मंच”, कानपुर* *GK चिंतनधारा 1* *Dt 01.12.2015* एक विवाह में जाना था वर्षो से इंतजार था उस दिन का, बहुत उत्साह था की कब मेरे दोस्त की शादी हो और जाऊँ, मेरे परम मित्र के विवाह का प्रसंग था। बड़े उमंग से तैयारी की, 15 दिन तक शॉपिंग चली बहुत उत्साह और उमंगRead More

समयसार अतमख्याति टीका कलश 1

जीके ~ मङ्गलम् भगवान वीरो, मङ्गलम् गौतमोगणी मङ्गलम् कुन्दकुण्डद्यो जैन धर्मोस्तु मङ्गलम् आज दिनांक 22 जनवरी 2016 से समयसार ग्रन्थ और उसकी टीका आत्मख्याति का स्वाध्याय आरम्भ हो रहा है । ये स्वाध्याय हम सबके मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करे और निर्विध्न सम्पन्न हो ऐसी मंगल भावना के साथ यद्यपि हम सब द्रव्य दृष्टि सेRead More

” Online जैन मंच ” S.No. 140 दिनांक 12 .01.2016 साभार : हुकुमचंद जैन ?सबके भीतर निधि छिपी है? एक आदमी हीरे की खदान में काम करता था। एक दिन उसे कुछ नहीं मिला। एक पत्थर की छोटी सी शिला ही मिल गई। उसे मालिक से पूछकर घर ले आया और उसकी पत्नी उस परRead More

Tatvarth sutr adhyay 9 last sutra

निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? जीके ~आज तत्वार्थ सूत्र के अध्याय 9 का अंतिम सूत्र कल चर्चा चल रही थी की मुनि के भेद कैसे समझे कैसे पहिचाने तो पहली बात तो ये की पुलाक हो या बकुश या कोई औरRead More

मुनि के भेद

िज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? जीके ~आज मुनि के भेद मुनिराज के 5 भेद है पुलाक बकुश कुशील निर्ग्रन्थ स्नातक सुरभि ~सामान्य परिभासा पुलाक~ एक खास बात पहले दृष्टव्य है की सभी मुनिराज को सामान्यतया भी निर्ग्रन्थ ही कहते है तोRead More

Dhyan ध्यान

निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? जीके ~आज हम सहनन और ध्यान के बारे में चर्चा करेगे। इनमे से 3 उत्तम कहे गए है और 3 जघन्य बज्र वृषभ नाराच संहनन मोक्ष सिर्फ वज्रवृषभ नाराच संहनन वाले को ही होता हैं। शेषRead More

धर्म ध्यान Dharm Dhyan

निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? कल आर्त ध्यान की बात हुई थी आज रौद्र ध्यान रौद्र मतलब क्रूर परिणाम परिणामो की क्रूरता कुटिलता ये कल हो चूका है शायद ❓ हो गया गो तो आगे चले आज धर्म ध्यान सुनीता ~ओकेRead More

Shukla dhyan शुक्ल ध्यान

निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? जीके ~आज शुक्ल ध्यान हालाँकि धर्म ध्यान अभी पूर्ण नही हुआ है उसके अन्य 4 और 10 भेद भी है 4 अन्य भेद पिण्डस्थ पदस्थ रूपस्थ रूपतीत और 10 भेद भी है धर्म ध्यान के लेकिनRead More

तत्वार्थ सूत्र अध्याय 9 तप

? निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है ??? आज वैया्वृत्ति जीके ~वैयावृत्ति यानि सेवा करना मुनिराज की रोग आदिक के कारण आत्मा की थिरता में बाधा होने पर उनकी सेवा करना वैयावृत्ति है सभी अंतरंग तप के भेद अभी रह गए है उसकोRead More

स्वाध्याय तप

निज निधि निज में बताई यह अनंत उपकार् हैं । इसके लिये जिनवाणी माँ को व्ंदना शत बार हैं। ??? तप इच्छा का निरोध होना सो तप है इसके 2 भेद है बहिरंग और अंतरंग बहिरंग तप के पुनः 6 भेद है 1 अनशन 2 अवमौदर्य 3 वृत्ति परिसंख्यान 4 रस परित्याग 5 शय्या विवक्तिRead More

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निज निधि निज में बताई,यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है जीके: तत्वार्थ सूत्र अध्याय 7 सूत्र 37 सल्लेखना के अतिचार सल्लेखना मतलब मृत्यु का सहज स्वीकार मृत्यु एक अटल सत्य है और सत्य से मुह फेरना इससे बड़ा असत्य क्या हो सकता है श्रावक या मुनि जब अपनीRead More

णमोकार मन्त्र प्रश्न 2

प्रश्न~ OJM 2 णमोकार मंत्र को नमस्कार मंत्र क्यों कहते हैं?इसमें किनको नमस्कार किया गया है?उनको पदों के क्रम में लिखे। सबसे पहले अरहंतो को नमस्कार क्यों किया गया है? उतर~ OJM 2 णमोकार महामंत्र अनादिनिधन मंत्र है।इसमें पाँचो परमेष्ठियों को नमस्कार किया गया है।पाँचो परमेष्ठियों को नमस्कार करने के कारण ही णमोकार मंत्र कोRead More

Q 1 णमोकार मन्त्र

प्रश्न ~OJM 1 णमोकार महामंत्र की महिमा बताती हुई कोई कथा संक्षिप्त में लिखिए एवं प्रथम बार कहा और किसने लिखा था ये भी बताइये इस मन्त्र की भाषा कौन सी है और रचयिता कौन है ? 1 विशेष चिन्ह का नाम जिसमे मंत्र मे नमस्कारित पद गर्भित है❓ Ans~ यह अनादिनिधन महामन्त्र किसी केRead More

जब तक योग का अभाव न हो तब तक कर्मो का आस्रव नही रुकता ये कल सिद्ध हुआ था अब दूसरा सिद्धांत की हम सब जानते हैं की मुनि अवस्था में संवर प्रकट होता है संवर मतलव आस्रव का नोरोध कर्मो का आना रुक जाना ये दोनों ही बाटे एकदम विपरीत है अगर 13 गुणस्थानRead More

तत्वार्थ सूत्र अध्याय 7 सूत्र 1

निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत बार है जिनवाणी माता की जय। जीके: अब अध्याय 7 का पहला सूत्र व्रत किसे कहते हैं?? पाप प्रवत्ति के त्याग का नाम व्रत है और व्रत करने वाला यानि व्रती निशल्य होता है पाप कितने है?? मोनिका: 5Read More

पूजन by ज्ञानेन्द्र जैन जीके

पूजन स्थापना लखकर के स्वरूप तुम्हारा निज अंतर में खुद को ध्याऊँ तिष्ठो तिष्ठो तिष्ठो भगवन भावों में मैं तुम्हे बुलाऊ तुमको समझा न खुद को जाना अब तक यूँ ही समय गँवाया है तुम समान बनने को प्रभुवर मन चरण शरण में आया है ॐ ह्रीं श्री … जल जब जब हमने जल कोRead More

तत्वार्थ सूत्र अध्याय 6 सूत्र 1 व 2

जिनवाणी स्तुति: निज निधि निज में बताई यह अनन्त उपकार है इसके लिए जिनवाणी माँ को वन्दना शत् बार है।। जीके जी: आज तत्वार्थ सूत्र अध्याय 6 का प्रथम सूत्र योग किसे कहते हैं ?? सन्दीप: आत्मा के प्रदेशों में कम्पन होने को राजुल जी: आत्मा केप्रदेशो मे कंपन होना योग है जीके जी: योगRead More

1 त्रसनाली

“Online बाल मंच” जैन गणित संख्या “एक” विषय “त्रसनाली” १ तीन लोक में “त्रसनाली ” एक ही है २ त्रस जीव यानि २ इन्द्रिय से लेकर ५ इन्द्रिय तक के जीव जिन्हे त्रस जीव कहा जाता है वो सिर्फ “त्रसनाली” में पाये जाते हैं इसके बाहर नहीं ३ इस “त्रसनाली ” में समस्त षट कायRead More

2 “जीव के भेद”

“Online बाल मंच” जैन गणित संख्या “दो” विषय “जीव के भेद” जीव २ प्रकार के हैं १ संसारी २ मुक्त संसारी : तीन लोक में रहने वाले और कर्म से बिद्ध जीव संसारी कहलाते हैं इसमें चारो गति के जीव समाहित हैं संसारी जीव की कुछ विशिष्टताएं १.  संसारी जीव द्रव्य, भाव और नोकर्मो सेRead More

1 ॐ

“Online बाल मंच” जैन गणित संख्या “एक” विषय “ॐ” १. ॐ सबसे छोटा मंत्र है २ ॐ में पञ्च परमेष्ठी समाहित हैं कैसे ? अ = अरिहंत अ = अशरीरी (सिद्ध) आ  = आचार्य उ = उपाध्याय म = मुनिराज (साधू) अ+अ+आ+उ+म=ॐ ३ ॐ की उतपत्ति णमोकार मंत्र से हुई है ४ ॐ एकमात्र  ऐसाRead More

1 “सिद्धशिला”

“Online बाल मंच” जैन गणित संख्या “एक” विषय “सिद्धशिला” उर्ध्वलोक में सर्वार्थ सिद्धि विमान के ऊपर ईषत प्राग्भार नामक अष्टम वसुधा है जिसमे बीचोबीच में स्फटिक मणि के समान अर्धचन्द्राकार ४५ लाख योजन के विस्तार वाली “सिद्धशिला”  है आकार : अर्धचन्द्राकार (स्फटिक मणि के समान) विस्तार ४५ लाख योजन (मध्यलोक में स्थित ढाई दीप केRead More

सोनगढ़ में शिविर सम्पन्न

सोनगढ़ मै हुआ शिविर सम्पन्न – 15-7-15 से विगत 19-7-15 तक गुरु मंथन शिविर का आयोजन किया गया था। जिसमें पंडित टोडरमल स्मारक जयपुर , आचार्य धरसेन विद्यालय कोटा , आचार्य अकलंक देव जैन न्याय  विद्यालय बांसवाड़ा के शास्त्री वर्ग के समस्त छात्र पधारे । इस शिविर मै पंडित अभय जी देवलाली, पंडित शांति जीRead More

बारह भावना

बारह भावना १. अनित्य भावना द्रव्य रूप करी सर्व थिर, परिजय थिर है कौन द्रव्य दृष्टि आपा लखो, परिजय नय करी गौण   द्रव्य दृष्टि से देखा जाये तो संसार की सभी वस्तु नित्य हैं और पर्याय दृष्टि से सभी वस्तुएं अनित्य हैं मतलब क्षणभंगुर हैं विनाशीक हैं जैसे ये जीव है तो कब सेRead More

वीतराग विज्ञान भाग 2

वीतराग विज्ञान भाग २ पाठ एक देव-शास्त्र-गुरु पूजन के संदर्भ में कुछ बातें- १ यह पूजा पंडित युगल किशोर जी ‘युगल’ द्वारा लिखी गई है। २ यह एकमात्र ऐसी पूजन है, जिसमें १२ भावना का भी समावेश पूजा में ही कर दिया गया है। ३ यह अत्यंत उत्तम भाव लिए हुए है। ४ इसमें अर्घ्यRead More